रांची: रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार खूंटी महिला थाना की पूर्व प्रभारी सुलेखा कुमारी की जमानत खारिज हो गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला देते हुए आरोपी पूर्व थाना प्रभारी को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद फिलहाल सुलेखा कुमारी उर्फ सपना को न्यायिक हिरासत में ही जेल में रहना होगा। अदालत का यह रुख भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है।
सुलेखा कुमारी की जमानत खारिज होने का कारण
विशेष न्यायाधीश की अदालत में बचाव पक्ष की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एसीबी के विशेष लोक अभियोजक ने कड़ा विरोध जताया। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी एक जिम्मेदार पुलिस पदाधिकारी थीं और उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक मामले में मदद के नाम पर मोटी रकम की मांग की थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, केस डायरी और एसीबी द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा और जांच प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। इसी आधार पर सुलेखा कुमारी की जमानत खारिज करने का आदेश पारित किया गया।
केस में राहत के नाम पर मांगी थी 4.50 लाख रुपये की रिश्वत
यह पूरा प्रकरण खूंटी जिले के हुरलुंग निवासी श्याम कुमार की शिकायत से शुरू हुआ। श्याम कुमार के विरुद्ध खूंटी महिला थाना में एक मामला दर्ज था। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुलेखा कुमारी ने इस मामले में जांच में सहयोग करने, कानूनी कार्रवाई से राहत दिलाने और मदद करने के एवज में कुल 4.50 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता श्याम कुमार ने रिश्वत की रकम देने में असमर्थता जताई और इसकी शिकायत सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) रांची से कर दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने अपनी प्रारंभिक जांच और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की।
एसीबी की कार्रवाई और रंगे हाथ गिरफ्तारी
एसीबी के सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि हो गई। इसके बाद ब्यूरो ने एक योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप केस का आयोजन किया। 30 जुलाई को एसीबी की टीम ने जाल बिछाया। योजना के तहत शिकायतकर्ता को पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये लेकर थाना प्रभारी के पास भेजा गया। जैसे ही सुलेखा कुमारी ने रिश्वत की रकम ली, पहले से तैयार एसीबी की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद एसीबी ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था।
अदालत में सुनवाई और सख्त फैसला
गिरफ्तारी के बाद बचाव पक्ष की ओर से आरोपी की जमानत के लिए विशेष अदालत में अर्जी दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को फंसाया गया है और उनके पास से रिकवरी संदिग्ध है। हालांकि, एसीबी की ओर से पेश किए गए पुख्ता सबूत, रिकॉर्डेड बातचीत और केमिकल टेस्ट रिपोर्ट के सामने बचाव पक्ष की दलीलें टिक नहीं सकीं। अदालत ने माना कि एक महिला थाना प्रभारी जैसे संवेदनशील पद पर रहते हुए रिश्वत मांगना और लेना कर्तव्य का घोर उल्लंघन है। अदालत ने साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी।
आगे की कार्रवाई और विभागीय प्रभाव
अब इस मामले में एसीबी चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद पुलिस मुख्यालय स्तर से भी सुलेखा कुमारी के निलंबन और विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा चलने पर दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर किया है। आम लोगों का कहना है कि ऐसे सख्त फैसलों से ही व्यवस्था में विश्वास कायम रह सकता है। एसीबी झारखंड की आधिकारिक वेबसाइट पर भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया उपलब्ध है।
फिलहाल, पूर्व थाना प्रभारी सुलेखा कुमारी को जेल में ही रहना होगा। कानूनी जानकारों का मानना है कि निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद ऊपरी अदालत में राहत मिलना आसान नहीं होगा, क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जमानत के प्रावधान काफी सख्त हैं। इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



