18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भारत को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल हुई है। सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन 2026’ को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घोषणापत्र को व्यापक पहुंच और मजबूत उद्देश्य वाले BRICS का प्रतीक बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि यह दस्तावेज संगठन के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है, जिसका मुख्य केंद्र नवाचार और सतत विकास है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि अब समय आ गया है कि घोषणापत्र के फैसलों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। उन्होंने सदस्य देशों को याद दिलाया कि इन तय प्राथमिकताओं को ठोस नतीजों में बदलना सबकी साझा जिम्मेदारी है। यह घोषणापत्र वैश्विक शासन में सुधार, आर्थिक सहयोग और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

लगभग 45 पन्नों और 140 बिंदुओं वाले इस विस्तृत दस्तावेज में आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति को दोहराया गया है, जिसे भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें डिजिटल इनोवेशन, स्वास्थ्य सेवा, अंतरिक्ष सहयोग और वैश्विक वित्तीय सुधार जैसे कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच गहन सहमति बनी है, जो आने वाले समय में आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करेगा।
मौजूदा समय में BRICS एक अधिक विविध समूह बन चुका है, जिसमें भारत, चीन और रूस समेत 11 सदस्य देश शामिल हैं। विभिन्न देशों के अलग-अलग रणनीतिक हितों के बावजूद भारत की अध्यक्षता में इतनी बड़ी आम सहमति का बनना प्रधानमंत्री मोदी के कूटनीतिक कौशल का प्रमाण है। अब असली चुनौती इस घोषणापत्र में निर्धारित लक्ष्यों को व्यावहारिक धरातल पर उतारने की है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

