हाल ही में संपन्न हुए BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने न केवल वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया, बल्कि संगठन के भविष्य के लिए एक विस्तृत एजेंडा भी तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों को आने वाले समय की तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार करना है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से जानकारी दी कि BRICS देश अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और अधिक गहरा करेंगे। इसके साथ ही स्टार्टअप, MSME, विज्ञान और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों को भी इस सहयोग का मुख्य आधार बनाया जाएगा, ताकि नवाचार को नई गति मिल सके।

इस दौरान न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को और अधिक सशक्त बनाने पर भी सहमति बनी है, जो भविष्य के विकास एजेंडे को वित्तीय सहायता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अतिरिक्त, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर सदस्य देशों के बीच ठोस रणनीति तैयार करने पर चर्चा की गई है, जिससे एक मजबूत सप्लाई चेन का निर्माण हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS का यह नया दृष्टिकोण इसे केवल एक आर्थिक मंच तक सीमित न रखकर एक भविष्योन्मुखी वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। बदलते वैश्विक परिदृश्य में AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखकर लिया गया यह निर्णय संगठन की प्रासंगिकता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक बढ़ाने वाला साबित होगा।

