
झारखंड सरकार ने राज्य में अवैध शराब के कारोबार पर सख्ती बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को अवैध शराब के निर्माण, परिवहन, बिक्री और तस्करी पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही विभाग में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, जीपीएस आधारित निगरानी और रिक्त पदों पर जल्द भर्ती पूरी करने पर भी जोर दिया गया।
शराब परिवहन पर होगी GPS और डिजिटल लॉक से निगरानी
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शराब ढोने वाले सभी वाहनों में GPS ट्रैकिंग और डिजिटल लॉक लगाए जाएं, ताकि उनकी रियल-टाइम निगरानी की जा सके। इससे वाहनों के रूट, ठहराव और गंतव्य पर नजर रखना आसान होगा और अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगेगी। सरकार का मानना है कि तकनीक के उपयोग से उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
अवैध शराब कारोबार पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध शराब का कारोबार न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी गंभीर खतरा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध शराब बनाने, बेचने और तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
583 उत्पाद सिपाहियों की जल्द होगी नियुक्ति
मुख्यमंत्री ने विभाग में रिक्त पदों की समीक्षा करते हुए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने जानकारी दी कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से चयनित 583 उत्पाद सिपाहियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सरकार का उद्देश्य पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराकर विभाग की क्षमता बढ़ाना है।
राजस्व संग्रह में विभाग का बेहतर प्रदर्शन
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व संग्रह किया। वर्ष 2026-27 के लिए भी बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है और शुरुआती महीनों में ही लक्ष्य का उल्लेखनीय हिस्सा हासिल किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि आधुनिक निगरानी प्रणाली और प्रभावी प्रवर्तन से राजस्व संग्रह में और वृद्धि होगी।
नई मदिरा नीति और स्थानीय रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए नई मदिरा विनिर्माण नीति तैयार करने, औद्योगिक अल्कोहल के लिए अलग नीति बनाने और लाइसेंस प्रक्रियाओं को सरल करने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न जिलों में बनने वाले उत्पाद विभाग के गोदामों के निर्माण में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने की बात कही, ताकि रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें।
तकनीक आधारित प्रशासन की ओर कदम
झारखंड सरकार का मानना है कि GPS ट्रैकिंग, डिजिटल लॉक और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था से शराब की आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया पूरी होने से उत्पाद विभाग की कार्रवाई क्षमता बढ़ेगी और अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।




