रांची: सीआईएसएफ रिश्वत मामला में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के क्षेत्रीय वेतन एवं लेखा कार्यालय, रांची के तीन अधिकारियों को विशेष सीबीआई अदालत ने तीन दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। शुक्रवार को रांची स्थित विशेष सीबीआई अदालत में आरोपियों को पेश किया गया जहां सीबीआई की मांग पर अदालत ने रिमांड मंजूर कर ली।
गिरफ्तार अधिकारियों का विवरण
सीबीआई के अनुसार गिरफ्तार अधिकारियों में सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर संतोष कुमार महतो, असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर सुनील कुमार और असिस्टेंट अकाउंट्स ऑफिसर सुजीत कुमार सिंह शामिल हैं। तीनों पर कर्मचारियों के बिलों के भुगतान के बदले रिश्वत मांगने और लेने का गंभीर आरोप है।
रिश्वत की मांग और रंगे हाथ गिरफ्तारी
आरोप है कि तीनों अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित सीआईएसएफ-एनटीपीसी यूनिट के एक हेड कांस्टेबल से विभिन्न कर्मचारियों के यात्रा भत्ता (टीए) बिल और बच्चों की शिक्षा भत्ता समेत अन्य बिलों के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
सीबीआई ने बुधवार को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद गुरुवार को जाल बिछाकर कार्रवाई की गई और तीनों अधिकारियों को 48,400 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा की गई।
पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपियों से जुड़े पांच ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण और आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई हैं:
- डिजिटल उपकरण (मोबाइल, लैपटॉप, पेन ड्राइव)
- संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेज
- निवेश संबंधी रिकॉर्ड
- आभूषणों से जुड़े दस्तावेज
- बैंक लेनदेन संबंधी कागजात
- बड़ी मात्रा में नकदी
सीबीआई ने बताया कि तलाशी के दौरान पर्याप्त मात्रा में नकद राशि भी बरामद की गई है। बरामद दस्तावेजों की जांच से आय से अधिक संपत्ति का मामला भी सामने आ सकता है।
जांच का दायरा बढ़ने की संभावना
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या रिश्वतखोरी का यह मामला केवल इन तीन अधिकारियों तक सीमित था या इसमें अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। सीबीआई का कहना है कि सीआईएसएफ रिश्वत मामला की गहन जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और बरामद दस्तावेजों तथा वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल होगी।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से यह जानने का प्रयास किया जाएगा कि रिश्वत की रकम का बंटवारा कैसे होता था और क्या वरिष्ठ अधिकारियों तक भी इसकी पहुंच थी। डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच से और खुलासे होने की उम्मीद है।
सीआईएसएफ में भ्रष्टाचार का यह पहला मामला नहीं
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में भ्रष्टाचार के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। सीआईएसएफ देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों, मेट्रो और परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा का जिम्मा संभालती है। बल में वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए विभागीय सतर्कता तंत्र भी सक्रिय है, लेकिन इस तरह के मामले व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
झारखंड में सीबीआई की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है। इससे पहले भी राज्य में कई सरकारी अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया है। फिलहाल मामले की आगे की जांच जारी है और रिमांड अवधि पूरी होने के बाद आरोपियों को फिर से अदालत में पेश किया जाएगा।

