रांची: झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के तत्वावधान में राज्यभर के विद्यालयों में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय खेल दिवस अभियान शनिवार को उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। “खेलेगा भारत, जीतेगा भारत” और “एक घंटा खेल के मैदान में” की थीम पर आधारित इस आयोजन ने गांव से लेकर शहर तक के स्कूलों को खेल, फिटनेस और ऊर्जा के रंग में रंग दिया।
तीन दिन तक गुलजार रहे विद्यालय परिसर
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर चले इस अभियान में सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों के लाखों छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। तीन दिनों तक विद्यालय परिसर विविध खेल गतिविधियों, फिटनेस कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं से गुलजार रहे। अभियान का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को खेल मैदान से जोड़ना और फिटनेस के प्रति जागरूक करना रहा।
मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि के साथ शुरुआत
अभियान के पहले दिन हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद खेल शपथ, मार्च पास्ट और विभिन्न आयु वर्गों के अनुरूप खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। दूसरे दिन फिटनेस गतिविधियों पर जोर रहा, जिसमें योग, एरोबिक्स और सामूहिक व्यायाम शामिल थे। अंतिम दिन संडे ऑन साइकिल (साइकिल रैली) और दौड़ प्रतियोगिताओं ने समापन को विशेष बना दिया।
शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता बनी मिसाल
इस आयोजन की सबसे खास बात विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता रही। शिक्षकों ने बच्चों के साथ खेल गतिविधियों और छात्र-शिक्षक मैत्री मुकाबलों में हिस्सा लेकर खेलों के प्रति उत्साह को नई ऊर्जा दी। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों का मानना है कि यह सहभागिता विद्यालयों में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।
डिजिटल युग में खेल मैदान की जरूरत
शिक्षा विभाग की यह पहल आज के दौर में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जब बच्चे और युवा अपना काफी समय मोबाइल एवं डिजिटल माध्यमों पर व्यतीत कर रहे हैं। ऐसे में खेल के मैदानों से उनका जुड़ाव शारीरिक सक्रियता, मानसिक मजबूती, अनुशासन और सामाजिक विकास के लिए आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित खेल गतिविधियां बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं।
अभिभावकों और समुदाय पर भी सकारात्मक प्रभाव
इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय खेल दिवस अभियान का सकारात्मक प्रभाव बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों पर भी पड़ा है। कई अभिभावकों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में बाहरी गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ती है। ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में भी उत्साह देखते ही बना, जहां संसाधनों की कमी के बावजूद बच्चों ने पूरे जोश से भाग लिया।
भविष्य में भी जारी रहेगी खेल संस्कृति
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने संकेत दिया है कि इस प्रकार के आयोजन आगे भी नियमित अंतराल पर किए जाएंगे। परिषद का प्रयास है कि खेल को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाया जाए, ताकि हर बच्चे को खेलने का अवसर मिले। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की “खेलो इंडिया” पहल के साथ तालमेल बिठाते हुए राज्य में खेल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है।
इस सफल आयोजन ने साबित कर दिया कि जब प्रशासन, शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर प्रयास करते हैं, तो परिणाम उत्साहजनक होते हैं। झारखंड के विद्यालयों में खेल की यह अलख आगे भी जलती रहे, यही कामना है।
स्रोत: राष्ट्रीय खेल दिवस (भारत)

