बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले में स्थित गोमिया में देह व्यापार चरम पर है और इसके कारण स्थानीय युवा पीढ़ी तेजी से गलत रास्ते की ओर भटक रही है। बाहरी लोगों का आवागमन बढ़ने से क्षेत्र में असामान्य हलचल देखी जा रही है जिससे आम नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
गोमिया में देह व्यापार से युवाओं पर पड़ रहा बुरा असर
स्थानीय सूत्रों के अनुसार इस अवैध धंधे में संलिप्त लोग अधिक धन कमाने की लालच में यहां के युवाओं को बहला-फुसलाकर गलत मार्ग पर ले जा रहे हैं। देह व्यापार के बढ़ते प्रभाव से युवा वर्ग अपनी पढ़ाई-लिखाई और करियर से विमुख होकर अंधकारमय भविष्य की ओर बढ़ रहा है। अभिभावक अपने बच्चों को बाजार या गोमिया मोड़ भेजने से भी डरने लगे हैं।
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “घर-परिवार के बच्चों को अब गोमिया मोड़ कैसे भेजें, बाजार जाना भी घर के बच्चों एवं परिवार के लिए दुभर हो गया है।” इस तरह की बातें दबी जुबान से हर घर में सुनाई दे रही हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
आक्रोशित नागरिकों का कहना है कि शासन-प्रशासन यदि इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान नहीं देती है तो आने वाले समय में गोमिया की युवा पीढ़ी बर्बादी के रास्ते पर चली जाएगी। कई स्थानीय लोगों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर पुलिस प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं लेता है तो आम लोगों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
गोमिया और आसपास के कई निवासियों ने कहा है कि जल्द ही अगर देह व्यापार का धंधा बंद नहीं होता है तो गोमिया की जनता सड़क पर उतरेगी और बड़ा आंदोलन करेगी। इस संबंध में स्थानीय थाना प्रभारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
समाज पर पड़ रहा दीर्घकालिक दुष्प्रभाव
समाजशास्त्रियों का मानना है कि ऐसे अवैध कारोबार से न केवल युवा पीढ़ी बर्बाद होती है बल्कि पूरे क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो जाता है। संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और अपराध कार्यालय (UNODC) की रिपोर्ट के अनुसार मानव तस्करी और देह व्यापार संगठित अपराध का एक रूप है जो समाज की जड़ों को खोखला कर देता है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए पुलिस प्रशासन के साथ-साथ समाज कल्याण विभाग, बाल संरक्षण इकाई और गैर-सरकारी संगठनों को मिलकर काम करना होगा। केवल छापेमारी से काम नहीं चलेगा, पुनर्वास और रोकथाम के ठोस उपाय करने होंगे।
नागरिकों की मांग- त्वरित कार्रवाई हो
गोमिया के जागरूक नागरिकों ने जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि इस गंभीर मामले में अविलंब हस्तक्षेप करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पीड़ित युवाओं के पुनर्वास और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाए ताकि वे मुख्यधारा में वापस लौट सकें।
देखना यह है कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर कब तक संज्ञान लेता है और क्या कार्रवाई करता है। तब तक गोमिया की जनता सड़क पर उतरने की तैयारी में है।

