रांची: झारखंड में 108 एंबुलेंस कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार से चरणबद्ध आंदोलन पर उतर आए हैं। आंदोलन के पहले दिन राज्यभर के कर्मचारियों ने काला बिल्ला लगाकर ड्यूटी की और सरकार के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया। संघ के प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि अगर मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह विरोध प्रदर्शन 14 से 19 सितंबर तक काला बिल्ला लगाकर जारी रहेगा।
आंदोलन का पूरा कार्यक्रम
कर्मचारी संघ द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 19 सितंबर को सभी जिलों में सिविल सर्जन कार्यालय से उपायुक्त कार्यालय तक कैंडल मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद 21 सितंबर को भिक्षाटन कार्यक्रम आयोजित होगा। 23 सितंबर को जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। आंदोलन के अंतिम चरण में 25 सितंबर को राज्यव्यापी एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल की घोषणा की गई है। इस दिन नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कार्यालय के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन होगा।
108 एंबुलेंस कर्मचारी की प्रमुख मांगें
संघ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक के 6 अगस्त 2026 के निर्देशों का हवाला देते हुए कई अहम मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि जिला स्तर पर सरकारी माध्यम से 108 एंबुलेंस सेवा शुरू की जाए। दूसरी प्रमुख मांग सम्मान फाउंडेशन से हटाए गए कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लेने की है। इसके अलावा कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन समेत सभी वैधानिक अधिकार देने की मांग शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वे इन सुविधाओं से वंचित हैं।
कर्मचारियों का आरोप और आगे की रणनीति
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि वर्तमान में सेवा संचालन का जिम्मा निजी संस्था के पास है, जिसके कारण उनका शोषण हो रहा है। उन्हें न तो समय पर वेतन मिलता है और न ही कानूनी लाभ। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार और एनएचएम को कई बार ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि 25 सितंबर की हड़ताल के बाद भी मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया जा सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
108 एंबुलेंस सेवा झारखंड की ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का पूरा दारोमदार इसी सेवा पर है। कर्मचारियों के आंदोलन और संभावित हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। हालांकि कर्मचारी संघ का दावा है कि आपात सेवाओं को बाधित नहीं किया जाएगा, लेकिन पूर्ण हड़ताल के दौरान हालात बिगड़ सकते हैं।
इस पूरे प्रकरण पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड की आधिकारिक वेबसाइट पर दिशा-निर्देश देखे जा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए NHM Jharkhand Official Website पर जाएं।

