नालंदा जिले के हिलसा उपकारा में बंदी दरबार आयोजित, 22 परिवाद प्राप्त हुए

बंदी दरबार

बिहारशरीफ: नालंदा जिले के हिलसा उपकारा में गुरुवार को बंदी दरबार का आयोजन किया गया। अनुमंडल पदाधिकारी हिलसा अमित कुमार पटेल की अध्यक्षता में लगे इस दरबार में कुल 22 परिवाद प्राप्त हुए। जिलाधिकारी नालंदा के निर्देश पर हुए इस आयोजन का मकसद बंदियों की समस्याओं का त्वरित निष्पादन करना था।

बंदी दरबार का आयोजन और उद्देश्य

जिलाधिकारी नालंदा के आदेश के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी हिलसा अमित कुमार पटेल ने गुरुवार को उपकारा हिलसा में बंदी दरबार लगाया। इस दौरान बंदियों की समस्याओं और शिकायतों को बारीकी से सुना गया। प्रशासन का उद्देश्य था कि कारागार में निरुद्ध बंदियों की वास्तविक परेशानियों को जानकर उनका नियमानुसार समाधान किया जाए। ऐसे आयोजन पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जाते हैं।

प्राप्त परिवादों का विवरण

बंदी दरबार के दौरान बंदियों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखीं। इस क्रम में कुल 22 परिवाद प्राप्त हुए। इन परिवादों में बंदियों की व्यक्तिगत परेशानियों, विधिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा कारागार की आंतरिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। सभी परिवादों को लिखित रूप में दर्ज कर लिया गया है।

अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश

प्राप्त सभी 22 परिवादों को संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई एवं निष्पादन हेतु भेज दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी अमित कुमार पटेल ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि बंदियों द्वारा उठाए गए मामलों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए नियमानुसार त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही ससमय निष्पादन की रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।

बंदी दरबार की प्रक्रिया और महत्व

बंदी दरबार एक प्रशासनिक पहल है जिसके तहत वरिष्ठ अधिकारी स्वयं कारागार जाकर बंदियों से रूबरू होते हैं। इसकी शुरुआत बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा और उनकी जायज शिकायतों के निपटारे के लिए की गई थी। बिहार में यह व्यवस्था कई जिलों में लागू है। नालंदा जिला प्रशासन भी इस परंपरा को नियमित रूप से निभा रहा है। ऐसे आयोजनों से कारागार प्रशासन और बंदियों के बीच संवाद स्थापित होता है तथा छोटी-छोटी समस्याओं का मौके पर ही समाधान संभव हो पाता है।

पूर्व के अनुभव और अपेक्षाएं

इससे पहले भी हिलसा उपकारा में बंदी दरबार आयोजित किए जाते रहे हैं। पूर्व के अनुभवों के आधार पर बंदियों को इस बार भी उम्मीद थी कि उनकी बात सुनी जाएगी। अनुमंडल पदाधिकारी ने जिस गंभीरता से परिवादों को लिया, उससे बंदियों में न्याय की आस जगी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग कितनी तेजी से इन 22 परिवादों का निष्पादन करते हैं।

निष्कर्ष

नालंदा जिले के हिलसा उपकारा में आयोजित बंदी दरबार एक सकारात्मक पहल है। 22 परिवादों का प्राप्त होना दर्शाता है कि बंदियों को प्रशासन पर भरोसा है। अब गेंद संबंधित अधिकारियों के पाले में है। समयबद्ध निष्पादन ही इस आयोजन की सार्थकता सिद्ध करेगा। जिला प्रशासन की यह संवेदनशील पहल अन्य जिलाओं के लिए भी अनुकरणीय है।

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