नई दिल्ली: पाकिस्तानी दुल्हनें करीब डेढ़ साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भारत पहुंचीं और शादी की रस्में पूरी कीं। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद वाघा-अटारी बॉर्डर बंद होने से दोनों देशों के बीच रिश्तों की डोर कमजोर पड़ गई थी, लेकिन गृह मंत्रालय की विशेष पहल से अब उम्मीद जगी है।
पाकिस्तानी दुल्हनें कनेक्टिंग फ्लाइट से आईं भारत
रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 150 पाकिस्तानी दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर से कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे भारतीय शहरों में पहुंचीं। सामान्य समय में ये दुल्हनें वाघा बॉर्डर से आसानी से आ-जा सकती थीं, लेकिन जमीनी सीमा बंद होने के कारण उन्हें हवाई रास्ते से घूमकर आना पड़ा। इस साल अप्रैल से जून के बीच दुल्हनें करीब 450 रिश्तेदारों के साथ भारत आईं।
गृह मंत्रालय और शदानी दरबार की अहम भूमिका
गृह मंत्रालय ने सिंध के सम्मानित धार्मिक स्थल शदानी दरबार के साथ मिलकर इन यात्राओं के लिए विशेष छूट दी। शदानी दरबार के पीठाधीश संत युधिष्ठिरलाल शदानी अब रायपुर में रहते हैं। 18वीं सदी के संत शदाराम साहिब के सम्मान में बने इस दरबार का सीमा के दोनों ओर रहने वाले समुदाय के लिए बहुत महत्व है। पाकिस्तानी रिश्तेदारों को दुल्हन के साथ आने की इजाजत तो थी, लेकिन उन्हें तय समय के अंदर वापस लौटना था, इसलिए शादियां सादगी से हुईं।
लंबे इंतजार के बाद पूरी हुई शादियां
लंबे समय के वीजा पर भारत में रह रहे इंकेश जशनानी की सगाई ऑपरेशन सिंदूर से पहले हुई थी। उनकी होने वाली पत्नी आरती, सिंध की खानपुर तहसील से मुश्किल सफर तय करके मई 2025 में वाघा बॉर्डर से सिर्फ एक किलोमीटर दूर पहुंची थीं, तभी भारत ने अटारी गेट बंद कर दिया। एक साल से ज्यादा समय के बाद, आरती मस्कट होते हुए नागपुर आईं और मार्च में शादी की। वीजा पाबंदियों के कारण उनके साथ सिर्फ उनके भाई आए, जबकि उनके माता-पिता पीछे ही रह गए।
भारतीय नागरिकता लेने के बाद नागपुर में रहने वाले संजय कलानी की सगाई तीन साल पहले सिंध के घोटकी जिले की काजल से हुई थी। शादी पिछले साल होनी थी, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद काजल और उनका परिवार बॉर्डर पार नहीं कर पाया। आखिरकार 5 महीने पहले यह कपल शादी के बंधन में बंधा, जब काजल कराची से मस्कट होते हुए दिल्ली और फिर नागपुर पहुंचीं। संजय के भाई धीरज को भी राहत मिली जब उनकी मंगेतर संजना, सिंध की एक अंदरूनी तहसील मीरपुर से उसी रास्ते से भारत आईं।
अभी भी 300 दुल्हनें कर रही हैं इंतजार
समुदाय के नेताओं का कहना है कि यह सिंध से आया पहला जत्था है और भारत सरकार को इंतजार कर रही दूसरी दुल्हनों के लिए भी ऐसा ही कदम उठाना चाहिए। भारत में शादी करने के लिए अभी भी 300 लड़कियां इंतजार कर रही हैं। वाघा बॉर्डर खुलने तक हवाई रास्ता ही एकमात्र विकल्प बना हुआ है।
टीओआई को पाकिस्तानी दुल्हनों के वीजा परमिट और दस्तावेज मिले हैं और कई खुशहाल जोड़ों से बात भी की गई है। इस पहल से दोनों देशों के आम लोगों के बीच रिश्तों की डोर फिर से मजबूत होने की उम्मीद जगी है।

