पटना: बिहार पेपर लीक समिति का गठन कर राज्य सरकार ने परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है। रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की अनुशंसा के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
बिहार पेपर लीक समिति की संरचना और अधिकार
इस उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट के सेवारत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। इस प्रावधान से समिति की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और गंभीरता सुनिश्चित हो सकेगी। समिति को अपनी विस्तृत अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपने के लिए तीन माह का समय दिया गया है। यह समिति विभिन्न परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों और अन्य भर्ती एजेंसियों द्वारा आयोजित की जाने वाली समस्त परीक्षा प्रक्रियाओं में सुधार के लिए कार्य करेगी।
पेपर लीक रोकथाम के लिए प्रभावी उपायों पर जोर
समिति के कार्यक्षेत्र में परीक्षा कैलेंडर के निर्माण, प्रश्न पत्रों की गुणवत्ता में सुधार, परीक्षा सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना और पेपर लीक की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय सुझाना शामिल है। विशेषज्ञ समिति परीक्षा संचालन, प्रश्न-पत्र निर्माण, मूल्यांकन, परिणाम घोषणा और शिकायत निवारण सहित पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने के लिए व्यापक अनुशंसाएं प्रस्तुत करेगी।
प्रश्न-पत्रों की सुरक्षित ट्रैकिंग के लिए चेन ऑफ कस्टडी प्रोटोकॉल
प्रश्न-पत्र एवं उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के लिए चेन ऑफ कस्टडी प्रोटोकॉल विकसित करने पर विशेष विचार किया जाएगा। इससे हर स्तर पर प्रश्न-पत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा समिति परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली लागू करने, सीसीटीवी निगरानी को अनिवार्य बनाने तथा जरूरत पड़ने पर परीक्षाओं की फोरेंसिक जांच की अनुशंसा भी कर सकती है। इन उपायों से किसी भी प्रकार की धांधली की गुंजाइश खत्म हो सकेगी।
राज्य परीक्षा कैलेंडर से दूर होगी अनावश्यक देरी
विशेषज्ञ समिति परीक्षाओं, मूल्यांकन और परिणामों की घोषणा में होने वाली देरी के कारणों की गहन समीक्षा करेगी। इसके आधार पर एक राज्य परीक्षा कैलेंडर तैयार करने की अनुशंसा की जाएगी। इस कैलेंडर में विज्ञापन जारी करने से लेकर आवेदन प्रक्रिया, प्रवेश-पत्र निर्गमन, परीक्षा आयोजन, प्रोविजनल उत्तर कुंजी का प्रकाशन, आपत्तियों का निपटारा, अंतिम उत्तर कुंजी का प्रकाशन, मूल्यांकन, परिणाम की घोषणा तथा जांच/पैनल मूल्यांकन और अनुशंसा भेजने के लिए अधिकतम समय-सीमा निर्धारित करने का प्रावधान किया जा सकता है।
इस पहल से परीक्षाओं में अनावश्यक देरी पर प्रभावी लगाम लगेगी और छात्रों को समय पर परिणाम मिल सकेंगे। प्रश्न-पत्रों की तैयारी की पूरी प्रक्रिया की भी व्यापक समीक्षा की जाएगी ताकि गुणवत्ता और गोपनीयता दोनों सुनिश्चित हो सकें। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) जैसी प्रमुख भर्ती एजेंसियों की परीक्षाएं इस सुधार प्रक्रिया के दायरे में आएंगी।
छात्रों और अभ्यर्थियों में जगी नई उम्मीद
इस समिति के गठन से लाखों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से पेपर लीक और परीक्षा में धांधली की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिससे युवाओं का विश्वास परीक्षा प्रणाली से डगमगा गया था। सरकार का यह कदम उस विश्वास को बहाल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायिक पृष्ठभूमि वाले अध्यक्ष के नेतृत्व में समिति की अनुशंसाओं को लागू करवाने में कानूनी बाधाएं कम आएंगी और इनकी स्वीकार्यता भी अधिक होगी। तीन माह की समय-सीमा तय करने से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है और त्वरित कार्रवाई चाहती है।

