कोलकाता: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर भाजपा ने हासिरानी रथ को उम्मीदवार घोषित करके राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है। चंद्रनाथ रथ की मई में हुई हत्या के बाद उनकी मां को टिकट देना भाजपा का भावनात्मक और रणनीतिक दांव माना जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक रहे चंद्रनाथ रथ लंबे समय तक संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे थे।
नंदीग्राम में भाजपा का बड़ा दांव
भारतीय जनता पार्टी ने नंदीग्राम विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में हासिरानी रथ को अपना प्रत्याशी बनाया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब उनके पुत्र चंद्रनाथ रथ की इसी साल मई महीने में हत्या कर दी गई थी। चंद्रनाथ रथ भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी माने जाते थे। वे लंबे समय तक उनके निजी सहायक के रूप में कार्य करते रहे और पार्टी संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
हासिरानी रथ को टिकट देकर भाजपा ने सहानुभूति लहर को भुनाने का प्रयास किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम नंदीग्राम के मतदाताओं में भावनात्मक जुड़ाव पैदा कर सकता है। नंदीग्राम वही सीट है जहां से 2021 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
हासिरानी रथ को नंदीग्राम से टिकट
हासिरानी रथ की उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही नंदीग्राम का चुनावी माहौल गरमा गया है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चंद्रनाथ रथ की शहादत को सम्मान देते हुए उनकी मां को मैदान में उतारना पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेगा। चंद्रनाथ रथ 41 वर्ष के थे और पूर्वी मेदिनीपुर जिले के चांदपुर गांव के रहने वाले थे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने करीब दो दशक तक भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दी थीं।
उन्होंने रहड़ा रामकृष्ण मिशन से शिक्षा प्राप्त की थी और रामकृष्ण मिशन के विचारों से गहरे प्रभावित थे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, एक समय उन्होंने आध्यात्मिक जीवन अपनाने पर भी विचार किया था, लेकिन अंततः उन्होंने जनसेवा का मार्ग चुना। शुभेंदु अधिकारी के साथ उनकी निकटता जगजाहिर थी और वे अधिकारी के चुनाव प्रबंधन से लेकर संगठनात्मक कार्यों तक में अहम भूमिका निभाते थे।
चंद्रनाथ रथ का राजनीतिक सफर
चंद्रनाथ रथ का राजनीतिक सफर भारतीय वायुसेना की नौकरी छोड़ने के बाद शुरू हुआ। वायुसेना में लगभग 20 वर्ष सेवा देने के बाद वे सक्रिय राजनीति में आए और शुभेंदु अधिकारी के साथ जुड़ गए। अधिकारी जब तृणमूल कांग्रेस में थे, तब भी चंद्रनाथ उनके साथ थे और भाजपा में आने के बाद भी उन्होंने साथ नहीं छोड़ा। वे नंदीग्राम और आसपास के इलाकों में भाजपा के जमीनी संगठन को मजबूत करने में लगे रहे।
उनकी हत्या के बाद भाजपा ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया था और आरोप लगाया था कि सत्ताधारी दल के इशारे पर यह वारदात हुई। हालांकि पुलिस जांच में निजी रंजिश की बात भी सामने आई थी। इस घटना के बाद नंदीग्राम में तनाव का माहौल बना रहा था। अब उनकी मां को उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने इस मुद्दे को फिर से जीवंत कर दिया है।
तृणमूल के बागी गुट ने भी उतारे प्रत्याशी
उधर, तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने भी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना दिया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले इस गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट से सफीउद्दीन शेख को मैदान में उतारा है। रेजीनगर सीट से भाजपा ने शाखारव सरकार को टिकट दिया है।
तृणमूल कांग्रेस में यह बगावत 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद खुलकर सामने आई थी। बागी गुट का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व जनता से कट गया है और भ्रष्टाचार में लिप्त है। इस गुट के लिए यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है, जिसके जरिए वे अपनी राजनीतिक हैसियत आंकना चाहते हैं।
2026 चुनाव के बाद बदले समीकरण
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने बड़ा उलटफेर किया था। तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया। कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी या बागी तेवर अपना लिए। ऋतब्रत बनर्जी गुट इसी कड़ी का हिस्सा है। नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव को 2026 के नतीजों के बाद पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
इन दोनों सीटों पर जीत-हार से राज्य की भावी राजनीतिक दिशा तय होगी। भाजपा जहां अपनी बढ़त कायम रखना चाहती है, वहीं तृणमूल कांग्रेस आधिकारिक प्रत्याशियों के जरिए खोई जमीन वापस पाने की कोशिश करेगी। बागी गुट अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर भविष्य की संभावनाएं तलाश रहा है।
नंदीग्राम पर टिकी सबकी नजरें
नंदीग्राम हमेशा से पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्रबिंदु रहा है। 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से लेकर 2021 के विधानसभा चुनाव तक इस क्षेत्र ने राज्य की सियासत को दिशा दी है। अब एक बार फिर नंदीग्राम चर्चा में है। हासिरानी रथ की उम्मीदवारी ने इस सीट को भावनात्मक रूप से और संवेदनशील बना दिया है।
चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के साथ ही प्रचार अभियान तेज हो जाएगा। सभी दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतरेंगे। नंदीग्राम का नतीजा न केवल इस सीट का भविष्य तय करेगा, बल्कि पूरे राज्य की राजनीतिक हवा का रुख भी बताएगा। नंदीग्राम का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि यह क्षेत्र हमेशा निर्णायक साबित हुआ है।

