नई दिल्ली: विश्वकर्मा पूजा सृजन, शिल्प और तकनीकी कौशल के आराध्य देव भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है। प्रत्येक वर्ष कन्या संक्रांति के अवसर पर 17 सितंबर को यह पर्व मनाया जाता है। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं, बल्कि श्रम, हुनर और तकनीक के सम्मान का भी प्रतीक है।
विश्वकर्मा पूजा: महत्व और पौराणिक पृष्ठभूमि
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा देवताओं के दिव्य वास्तुकार और शिल्पकार हैं। उन्होंने स्वर्गलोक, इंद्रपुरी, द्वारका तथा लंका जैसे दिव्य नगरों का निर्माण किया। विभिन्न पुराणों में उनके द्वारा देवताओं के लिए भव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और दिव्य नगरों के निर्माण की कथाएं मिलती हैं। इसी कारण उन्हें निर्माण, वास्तुकला, शिल्प और तकनीकी दक्षता का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। संजय सर्राफ ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए वज्र, पुष्पक विमान और सुदर्शन चक्र जैसे दिव्य अस्त्रों का भी निर्माण किया था।
पूजा विधि और परंपराएं
विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, कार्यशालाओं और तकनीकी संस्थानों में मशीनों, औजारों और उपकरणों की विधिवत पूजा की जाती है। प्रातःकाल स्नान के बाद कार्यस्थल की साफ-सफाई कर मशीनों को सजाया जाता है। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधि-विधान से पूजा, हवन एवं आरती की जाती है। कई स्थानों पर श्रमिकों और कर्मचारियों के लिए प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन भी होता है।
मुख्य पूजा सामग्री
- फूल, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य
- मशीनों और औजारों पर रोली-अक्षत का तिलक
- कलश स्थापना और मौली बांधना
- विश्वकर्मा चालीसा और आरती का पाठ
आधुनिक युग में प्रासंगिकता
आधुनिक युग में जब विज्ञान और तकनीक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का अभिन्न अंग बन चुके हैं, तब विश्वकर्मा पूजा की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। यह पर्व कार्यस्थल पर सुरक्षा, अनुशासन और मशीनों के उचित रखरखाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। संजय सर्राफ ने कहा कि श्रम का सम्मान, कौशल का विकास और तकनीक का सदुपयोग ही प्रगति का आधार है। यह पर्व मनुष्य को ईमानदारी, लगन, सृजनशीलता और कर्मनिष्ठा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।
सामाजिक और आर्थिक संदेश
विश्वकर्मा पूजा का प्रमुख संदेश है कि किसी भी निर्माण कार्य की सफलता के पीछे श्रमिकों, कारीगरों और तकनीकी विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यह पर्व समाज को कर्म, कौशल और रचनात्मकता के माध्यम से राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने की प्रेरणा प्रदान करता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया पर विश्वकर्मा पूजा देखें।

