काठमांडू: नेपाल में भीषण बाढ़ ने पिछले 33 वर्षों की सबसे बड़ी आपदा का रूप ले लिया है। इस जल प्रलय में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 133 भारतीयों सहित 1000 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा से अंदाजन 200 बिलियन नेपाली रुपये, यानी करीब 12 हजार करोड़ भारतीय रुपये से अधिक के बुनियादी ढांचे का नुकसान हुआ है।
नेपाल में भीषण बाढ़ की वजह और प्रभावित क्षेत्र
अधिकारियों के अनुसार, यह भयावह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब तिब्बत की सीमा के पास एक भूकंप आया। माना जा रहा है कि भूकंप के झटकों की वजह से ग्लेशियल लेक फट गया, जिससे पानी का बहाव तीव्र गति से नदियों में आ गया। भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए।
इसके बाद बाढ़ का पानी नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया। इसने राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल सरकार ने लगभग 500 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है, जबकि चीन के सीमावर्ती हिस्से में भी तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
भयावहता बयां करते वीडियो और बचाव कार्य
नेपाल से सामने आए कई वीडियो इस तबाही की भयावहता को बयां करते हैं। इन वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से बहता दिखाई दिया, जिसने इमारतों और वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। एक वीडियो में एक चार मंजिला इमारत को पल भर में बहते हुए देखा जा सकता है, जबकि दूसरे वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल टूटता हुआ नजर आया। कई पुल तेज बहाव के कारण ढह गए। प्रभावित इलाकों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
भारत ने इस मुश्किल घड़ी में नेपाल को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात की और मानवीय सहायता का आश्वासन दिया। भारत ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भी भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और नेपाल सरकार के अधिकारियों के संपर्क में है।
अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 1000 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय शामिल हैं। यह संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि कई दूरदराज के इलाकों से संपर्क अभी भी टूटा हुआ है।
बुनियादी ढांचे को भारी क्षति
इस आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को गहरी चोट पहुंचाई है। सड़कें, पुल, बिजली लाइनें और संचार नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। 200 बिलियन नेपाली रुपये का नुकसान नेपाल की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, पुनर्निर्माण में वर्षों लग सकते हैं। नेपाल में बाढ़ की ऐतिहासिक घटनाएं दर्शाती हैं कि हिमालयी क्षेत्र में ऐसी आपदाओं की आशंका लगातार बनी रहती है।
आगे की चुनौतियां
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे बचाव कार्यों में बाधा आ सकती है। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है। वहीं, भारतीय दूतावास लगातार लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने में जुटा हुआ है।

