नई दिल्ली: शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशभर के चयनित 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस प्रतिष्ठित सूची में झारखंड के धनबाद स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य का नाम भी शामिल रहा।
राष्ट्रपति ने प्रदान किया प्रशस्ति पत्र और सम्मान राशि
समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुनमुन भट्टाचार्य को प्रशस्ति पत्र, शाल और 50 हजार रुपये की सम्मान राशि भेंट कर सम्मानित किया। इस पुरस्कार के लिए देशभर से शिक्षकों का चयन एक कठिन और पारदर्शी प्रक्रिया के बाद किया गया था। मुनमुन भट्टाचार्य की यह उपलब्धि न केवल धनबाद बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण है।
सीमित संसाधनों में नवाचार से बदली विद्यालय की तस्वीर
मुनमुन भट्टाचार्य ने सीमित संसाधनों के बीच नवाचार और लगातार प्रयासों के जरिए विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। उनके नेतृत्व में विद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। वे मानती हैं कि संसाधनों का अभाव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बाधा नहीं बनना चाहिए, बल्कि यह नवाचार के लिए प्रेरक शक्ति बन सकता है।
बच्चों को सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ने की पहल
मुनमुन भट्टाचार्य विद्यालय में बच्चों को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जोड़ने पर विशेष जोर देती हैं। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता जैसे विषयों को बच्चों की शिक्षा का अभिन्न अंग बना दिया है। उनका मानना है कि बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपने आसपास की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
कबाड़ से तैयार होती है नवाचारी शिक्षण सामग्री
विद्यालय में सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए कम लागत और बिना लागत वाली शिक्षण सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। बेकार पड़े सामान से उपयोगी शिक्षण सामग्री तैयार कर बच्चों को पढ़ाया जाता है। मुनमुन भट्टाचार्य का कहना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। बच्चे अपने आसपास के वातावरण और रोजमर्रा के अनुभवों से भी बहुत कुछ सीखते हैं। इसी सोच के साथ पढ़ाई को बच्चों के स्थानीय परिवेश से जोड़ने का सतत प्रयास किया जाता है।
खनन क्षेत्र धनबाद में शिक्षा की चुनौतियां
मुनमुन भट्टाचार्य ने बताया कि धनबाद खनन क्षेत्र होने के कारण यहां बच्चों की शिक्षा के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ स्कूल छोड़ने की समस्या भी लगातार सामने आती है। ऐसे विषम हालात में बच्चों को लगातार विद्यालय और शिक्षा से जोड़े रखना सबसे महत्वपूर्ण कार्य बन जाता है। उन्होंने इस दिशा में सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर भी बल दिया है।
माध्यमिक स्तर तक छात्राओं की पढ़ाई सुनिश्चित करना जरूरी
मुनमुन भट्टाचार्य ने छात्राओं की शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि प्राथमिक स्तर पर छात्राओं का नामांकन बेहतर रहता है, लेकिन माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर पहुंचने के साथ इसमें उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिलती है। इसलिए छात्राओं को उच्च कक्षाओं तक लगातार शिक्षा से जोड़े रखने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने इसके लिए अभिभावकों की काउंसलिंग और प्रोत्साहन योजनाओं को प्रभावी बनाने का सुझाव दिया।
शिक्षक-अभिभावक साझेदारी से सुधरेगा भविष्य
उन्होंने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षक और अभिभावक दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के साथ-साथ बच्चों के सामाजिक और पारिवारिक परिवेश को समझना भी उतना ही जरूरी है। सीमित संसाधनों के बावजूद सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयास से बच्चों को बेहतर दिशा दी जा सकती है। उनकी यह सोच देश के ग्रामीण और संसाधन-विहीन क्षेत्रों के शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत है।
इस सम्मान समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुनमुन भट्टाचार्य की इस उपलब्धि ने झारखंड के शिक्षा जगत में नई ऊर्जा का संचार किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित इस वार्षिक पुरस्कार समारोह का उद्देश्य देश के उत्कृष्ट शिक्षकों के योगदान को मान्यता देना और उन्हें प्रोत्साहित करना है।

