रामगढ़: रामगढ़ प्लांट ब्लास्ट में तीन इंजीनियरों की दर्दनाक मौत के बाद करीब 28 घंटे तक चले गतिरोध और आक्रोश का अंत देर रात मुआवजे पर सहमति बनने के साथ हुआ। बरकाकाना ओपी क्षेत्र के हेहल स्थित सीमेंट एंड इस्पात के पावर प्लांट में शुक्रवार देर रात हुए भीषण हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
रात 11:30 बजे टरबाइन में हुआ जोरदार धमाका
शुक्रवार की रात करीब 11:30 बजे पावर प्लांट के कंट्रोल रूम में नाइट शिफ्ट के दौरान इंजीनियर ड्यूटी पर तैनात थे। इसी बीच पावर प्लांट की टरबाइन में अचानक जोरदार ब्लास्ट हुआ। धमाके के साथ ही भीषण आग लग गई और देखते ही देखते चार इंजीनियर आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। प्रारंभिक जानकारी में ओवरहीटिंग और पैनल सिस्टम के फेल होने की बात सामने आई है। फैक्ट्री कर्मियों ने कंट्रोल रूम के एसी के कई दिनों से खराब होने और तापमान नियंत्रण को लेकर प्रबंधन से शिकायत किए जाने का भी दावा किया है। हालांकि हादसे की वास्तविक तकनीकी वजह जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
हादसे में तीन इंजीनियरों की गई जान
हादसे के बाद फैक्ट्री प्रबंधन आनन-फानन में सभी को रांची ले गया, जहां चिकित्सकों ने तीन इंजीनियरों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में गढ़वा निवासी अभिषेक पांडेय, धनबाद और बोकारो के एक-एक इंजीनियर शामिल हैं। एक इंजीनियर गंभीर रूप से घायल है, जिसका इलाज चल रहा है। गढ़वा निवासी इंजीनियर अभिषेक पांडेय के शव का पोस्टमार्टम रिम्स, रांची में कराया गया, जबकि धनबाद और बोकारो निवासी मृत इंजीनियरों के शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ था और परिजन बिना पोस्टमार्टम के ही शवों को वापस प्लांट लेकर पहुंचे थे।
28 घंटे तक चला परिजनों और ग्रामीणों का विरोध
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों, ग्रामीणों और स्थानीय नेताओं ने फैक्ट्री गेट पर धरना शुरू कर दिया। आंदोलन कर रहे लोगों का आरोप था कि हादसे के बाद लंबे समय तक फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। शाम करीब 4 बजे तक प्रबंधन और परिजनों के बीच कोई वार्ता नहीं हुई। इसी दौरान पूरे प्लांट की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई, जिसके कारण शवों को सुरक्षित रखने के लिए लाए गए डीप फ्रीजर नहीं चल सके। मजबूरन परिजनों को शवों को एंबुलेंस में एसी चलाकर रखने की व्यवस्था करनी पड़ी। इससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।
विधायक की मौजूदगी में देर रात बनी सहमति
लगातार बढ़ते विरोध के बीच करीब शाम पांच बजे फैक्ट्री के सीईओ प्लांट पहुंचे। इसके बाद मृतकों के परिजनों, बड़कागांव विधायक रोशन लाल चौधरी, ग्रामीणों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच मुआवजे समेत अन्य मांगों को लेकर बातचीत शुरू हुई। कई दौर की बातचीत और करीब 28 घंटे तक चले गतिरोध के बाद देर रात लगभग 1 बजे रामगढ़ प्लांट ब्लास्ट मुआवजे को लेकर सहमति बनी।
प्रत्येक मृतक के परिजन को मिला 31 लाख का मुआवजा
फैक्ट्री प्रबंधन ने प्रत्येक मृत इंजीनियर के परिजन को 31 लाख रुपये मुआवजा देने पर सहमति जताई। इसके बाद तड़के करीब 3 बजे विधायक रोशन लाल चौधरी की मौजूदगी में फैक्ट्री प्रबंधन ने मृत इंजीनियरों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये का चेक और अंतिम संस्कार के लिए एक-एक लाख रुपये नकद दिए। मुआवजे पर सहमति बनने के बाद स्थिति सामान्य होने की दिशा में बढ़ी, लेकिन हादसे को लेकर फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और कथित लापरवाही पर सवाल अब भी कायम हैं।
आज होगा पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार
मुआवजे पर सहमति के बाद अब रामगढ़ पुलिस की ओर से मृतकों के शवों की इंक्वेस्ट (पंचनामा) और पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी कराई जाएगी। इसके बाद शवों को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं। वहीं, फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
सुरक्षा मानकों पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस हादसे ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मियों का आरोप है कि कंट्रोल रूम का एसी लंबे समय से खराब था, जिसकी शिकायत प्रबंधन से की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ओवरहीटिंग और पैनल सिस्टम फेल होने की बात भी सामने आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, पावर प्लांट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तापमान नियंत्रण और अग्निशमन व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए। झारखंड सरकार के श्रम विभाग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और फैक्ट्री प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। औद्योगिक सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मृतकों के परिजनों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। इस दुखद घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों और इंजीनियरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।



