बेतिया: बिहार बस हादसा ने शनिवार सुबह पश्चिम चंपारण जिले के लौरिया थाना क्षेत्र को दहला दिया, जब एनएच-727 पर बनकटवा के समीप एक अनियंत्रित शाही ट्रेवल्स की बस ने सड़क किनारे छठियार समारोह में जुटी भीड़ को कुचल डाला। इस दर्दनाक घटना में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में कोहराम मच गया और आक्रोशित भीड़ ने कई वाहनों में तोड़फोड़ की।
बिहार बस हादसा: घटनास्थल पर मचा कोहराम
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बनकटवा गांव में एक घर पर छठियार समारोह का आयोजन था। मनोरंजन के लिए सड़क किनारे पंडाल लगाकर आर्केस्ट्रा और डीजे का कार्यक्रम चल रहा था। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे कार्यक्रम का आनंद ले रहे थे। इसी दौरान गोरखपुर से बेतिया की ओर जा रही शाही ट्रेवल्स की तेज रफ्तार बस अचानक अनियंत्रित हो गई। चालक ने नियंत्रण खो दिया और बस सीधे पंडाल में घुसते हुए लोगों को रौंदती हुई आगे निकल गई।
चीख-पुकार के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को निकालकर इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजना शुरू किया। सूचना मिलते ही लौरिया थाना पुलिस समेत आसपास के कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेतिया स्थित जीएमसीएच भेज दिया।
मृतकों की पहचान और घायलों का हाल
पुलिस ने मृतकों की पहचान देवेंद्र दूबे, संजय महतो, बहादुर महतो, भोला दूबे और छांगुर राम के रूप में की है। सभी स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है। प्रशासन ने घायलों के समुचित इलाज का आश्वासन दिया है। इस बीच, घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके पर खड़ी कई बसों के शीशे तोड़ डाले, पंडाल को क्षतिग्रस्त कर दिया और कुछ अन्य वाहनों को भी निशाना बनाया। पुलिस ने बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया और हालात पर काबू पाया।
जांच में जुटी पुलिस, चालक की तलाश जारी
पश्चिम चंपारण एसपी ने बताया कि मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और चालक की लापरवाही सामने आ रही है। बस चालक घटना के बाद मौके से फरार हो गया, जिसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। बस को जब्त कर लिया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसके अलावा, सड़क किनारे बिना अनुमति इस तरह के आयोजन और पंडाल लगाने की भी जांच होगी।
शोक और तनाव में डूबा इलाका
हादसे के बाद पूरे बनकटवा और आसपास के गांवों में मातमी सन्नाटा पसरा है। पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के बड़े-बुजुर्ग इस घटना को क्षेत्र की अब तक की सबसे भयावह सड़क दुर्घटना बता रहे हैं। तनाव को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। वरिष्ठ अधिकारी खुद कैंप कर रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एनएच-727 जैसे व्यस्त राजमार्ग पर सड़क किनारे इस तरह के आयोजन खतरनाक साबित हो सकते हैं। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, हाईवे के किनारे भीड़भाड़ वाले कार्यक्रमों के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य हैं। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक चूक और यातायात नियमों की अनदेखी को उजागर किया है।
मुआवजे की मांग, प्रशासन ने दिया आश्वासन
घटना के बाद स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की है। जिलाधिकारी ने कहा कि नियमानुसार आपदा प्रबंधन कोष से सहायता राशि शीघ्र दिलाई जाएगी। साथ ही घायलों के इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी घटना पर संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
फिलहाल, पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 279, 337, 338, 304ए के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। आगे की कार्रवाई जारी है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि रफ्तार का कहर किस तरह खुशियों को मातम में बदल देता है। प्रशासन को अब सख्त कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



