गर्भावस्था में तनाव लेने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा 42 फीसदी अधिक

गर्भावस्था में तनाव

नई दिल्ली: एक नए अध्ययन की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था में तनाव लेने वाली महिलाओं में गर्भपात का खतरा 42 फीसदी तक बढ़ जाता है। अध्ययनकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया है कि गर्भवती महिलाओं को किसी भी प्रकार का मानसिक दबाव लेने से बचना चाहिए।

अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष

हाल ही में किए गए इस शोध में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान ज्यादा तनाव में रहने वाली महिलाओं की तुलना में सामान्य जीवन जीने वाली महिलाओं के गर्भपात की आशंका काफी कम होती है। इससे पहले हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया था कि 24 सप्ताह की गर्भावस्था में होने वाले गर्भपात के लगभग 20 फीसदी मामलों के पीछे तनाव एक बड़ा कारण होता है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि दोबारा अध्ययन के बाद यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक पाया गया, क्योंकि गर्भपात के कई मामले आधिकारिक तौर पर दर्ज ही नहीं हो पाते हैं।

युवावस्था में तनाव का दीर्घकालिक प्रभाव

अध्ययन की रिपोर्ट में एक और गंभीर पहलू पर प्रकाश डाला गया है। इसमें बताया गया है कि युवा अवस्था में ही तनाव और अवसाद का सामना करने वाले व्यक्तियों को आगे के जीवन में कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इससे स्पष्ट होता है कि मानसिक स्वास्थ्य का असर केवल वर्तमान पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की शारीरिक सेहत पर भी गहरा पड़ता है।

गर्भावस्था में तनाव कम करने के उपाय

विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्भवती महिलाएं कामकाज के बोझ को लेकर बिल्कुल भी तनाव न लें। इसके लिए कुछ व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं:

  • प्राथमिकताएं कम करें: अपनी दिनचर्या की प्राथमिकताओं को थोड़ा घटाएं और दोस्तों या रिश्तेदारों से मदद लेने में बिल्कुल संकोच न करें।
  • घरेलू काम कम करें: घर के कामकाज को कम करके बचे हुए समय का उपयोग किताब पढ़ने, संगीत सुनने या आराम करने में करें।
  • कार्यस्थल पर छुट्टी लें: अगर आप कामकाजी हैं तो ऑफिस में सिक लीव या अपनी सालाना छुट्टियों का भरपूर लाभ लें।
  • योग और व्यायाम: लंबी सांस लेने-छोड़ने का अभ्यास करें, योग करें या हल्की स्ट्रेचिंग करें।
  • शारीरिक गतिविधि: अगर तैरना आता है तो स्वीमिंग करें या फिर नियमित रूप से वॉक पर जाएं।
  • संतुलित आहार: पौष्टिक और संतुलित भोजन लें। हेल्दी डाइट आपके शरीर और मानसिक सेहत दोनों को दुरुस्त रखेगी।
  • पूरी नींद लें: रात में जल्दी सो जाएं। पर्याप्त नींद गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए जरूरी समय देती है।
  • बातों को दिल पर न लें: गर्भावस्था के दौरान लोग तरह-तरह की कहानियां और अनुभव सुनाते हैं। उन्हें सुनें जरूर, लेकिन दिल पर न लें। हर किसी की गर्भावस्था अलग होती है, जरूरी नहीं कि दूसरों को हुई दिक्कतें आपके साथ भी हों।

चिकित्सीय परामर्श है जरूरी

अगर तमाम प्रयासों के बावजूद आपको लगता है कि आप तनाव में हैं और यह तनाव कम नहीं हो पा रहा है, तो बिना देर किए अपने डॉक्टर से खुलकर बात करें। चिकित्सक आपकी स्थिति को समझकर उचित काउंसलिंग या इलाज सुझा सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अधिक जानकारी के लिए आप WHO की आधिकारिक गाइडलाइन देख सकते हैं।

याद रखें, एक स्वस्थ मां ही स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है। इसलिए अपनी मानसिक सेहत का ख्याल रखना आपकी ही नहीं, बल्कि आपके आने वाले बच्चे की भी जिम्मेदारी है।

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