भोपाल: कूनो राष्ट्रीय उद्यान में शुक्रवार को बड़ी खुशखबरी आई जब भारत में जन्मी मादा चीता केजीपी-12 ने चार शावकों को जन्म दिया। इस घटना के साथ ही उद्यान में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 54 हो गई है, जिनमें 37 चीते भारत में ही जन्मे हैं। प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के ठीक एक दिन बाद आई यह खबर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बढ़ी चीतों की संख्या
कूनो राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने शावकों के जन्म की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मादा चीता केजीपी-12 और उसके चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। निगरानी दल लगातार उन पर नजर रखे हुए है। इस जन्म के बाद कूनो में चीतों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में उद्यान में कुल 54 चीते मौजूद हैं, जो प्रोजेक्ट चीता की सफलता का स्पष्ट संकेत है। खास बात यह है कि इनमें से 37 चीतों का जन्म भारतीय धरती पर हुआ है, जो यहां के वातावरण में उनके सफल अनुकूलन को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी बधाई
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस खुशखबरी को साझा किया। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए “चार साल, चार नए जीवन” की संज्ञा देते हुए खास और महत्वपूर्ण पल बताया। मंत्री ने कहा कि चार नए शावकों का जन्म भारत में चीता संरक्षण की बढ़ती सफलता और इसके लिए किए जा रहे दृढ़ संकल्प का अच्छा प्रतीक है। उन्होंने इस अवसर पर कूनो और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े पूरे परिवार को बधाई देते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि करार दिया।
पूर्व में शावकों की मौत के बाद नई उम्मीद
यह खबर इसलिए भी अधिक राहत देने वाली है क्योंकि करीब चार महीने पहले इसी मादा चीता केजीपी-12 के चार शावकों की मृत्यु हो गई थी। उन शावकों का जन्म 11 अप्रैल 2026 को हुआ था और वे लगभग एक महीने की आयु में 12 मई 2026 को मृत पाए गए थे। वन विभाग के अनुसार, शावकों के शव आंशिक रूप से खाए हुए मिले थे, जिससे किसी जंगली जानवर द्वारा शिकार की आशंका जताई गई थी। हालांकि, उस घटना में मादा चीता पूरी तरह सुरक्षित रही थी। अब उसी मादा चीता द्वारा फिर से चार शावकों को जन्म देना कूनो में चीता प्रजनन और भारत में जन्मी चीता आबादी के विस्तार को लेकर उम्मीदों को नए पंख लगा गया है।
प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
विशेषज्ञों के अनुसार, केजीपी-12 का जन्म भारत में ही हुआ था और अब उसका स्वयं शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए खास महत्व रखता है। इससे भारत में जन्मे चीतों के प्राकृतिक रूप से प्रजनन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने का ठोस संकेत मिला है। कूनो में चीतों की संख्या बढ़ाने और उनके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के निरंतर प्रयासों के बीच चार नए शावकों का जन्म वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणवादियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। चार नए शावकों के जन्म के साथ कूनो में चल रहे चीता संरक्षण अभियान की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। प्रोजेक्ट चीता की आधिकारिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया पर जा सकते हैं।
वन विभाग के अधिकारी लगातार मां और शावकों की सेहत पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में शावकों की वृद्धि और उनके जीवित रहने की दर पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी। यह घटना न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आई है।



