
रांची: विजयादशमी के पावन अवसर पर हरमू रोड, रांची स्थित बाबू वीर कुंवर सिंह पार्क में सामूहिक शस्त्र पूजन का भव्य आयोजन किया गया। प्रातः 11 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज के सैकड़ों भाइयों ने उत्साह, श्रद्धा और गौरव के साथ भाग लिया तथा अपने-अपने शस्त्रों का विधि-विधान से पूजन किया।
कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित सभी भाइयों का तिलक लगाकर और पगड़ी पहनाकर आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया। पूरे आयोजन के दौरान आपसी भाईचारे, सामाजिक एकता और गौरवशाली क्षत्रिय परंपराओं के प्रति सम्मान का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पूर्वजों से चली आ रही शौर्य, साहस और स्वाभिमान की परंपरा को आगे बढ़ाना तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत से जोड़ना था। उपस्थित लोगों ने कहा कि शस्त्र और शास्त्र, दोनों ही क्षत्रिय परंपरा के अभिन्न अंग हैं। शस्त्र जहां रक्षा, साहस और शौर्य के प्रतीक हैं, वहीं शास्त्र ज्ञान, विवेक और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम के दौरान समाज की एकजुटता को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया। उपस्थित सदस्यों ने कहा कि किसी भी क्षत्रिय भाई या परिवार पर दुख अथवा संकट आने पर पूरा समाज उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा और हरसंभव सहयोग करेगा। ऐसे आयोजन समाज के लोगों को एक मंच पर लाने, आपसी संबंधों को सुदृढ़ करने और गौरवशाली परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित गणमान्य सदस्य
श्री मनीष सिंह, श्री राम सिंह, श्री विनोद सिंह, श्री रंजन सिंह, श्री सुनील कुमार सिंह आनंद सिंह, श्री सुमित सिंह, श्री अभिषेक सिंह, किंग महेंद्र, रिटायर्ड जज शिवनारायण सिंह ,लाल बाबू सिंह ,सर्वेश सिंह चंदेल जी न्यूज़ 7एयर चीफ ,अरुण सिंह नरेंद्र सिंह ,विनोद सिंह गहरवार , गौतम सिंह , हरेंद्र सिंह मुकेश सिंह, श्री सुबोध सिंह, श्री संतोष सिंह, श्री जितेंद्र सिंह, श्री रणधीर सिंह, श्री कर्नल बी.के. सिंह, श्री राजीव रंजन सिंह, श्री धर्मेंद्र सिंह, श्री नागेंद्र सिंह, श्री दिलीप सिंह, श्री विपिन सिंह, श्री अमरजीत सिंह, श्री रामेश्वर दयाल, श्री आदर्श सिंह, श्री यश परमार एवं अन्य गणमान्य सदस्य।
इनके अतिरिक्त क्षत्रिय समाज के सैकड़ों भाइयों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सामूहिक शस्त्र पूजन में भाग लिया।
कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, भाईचारे और पूर्वजों की गौरवशाली परंपराओं को निरंतर आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ



