नई दिल्ली: पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने वाला पितृ पक्ष शनिवार से शुरू हो चुका है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक का समय श्राद्ध एवं पितृ पक्ष कहलाता है। इस दौरान पितरों की मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों के श्राद्ध का भोजन कौवे को खिलाने की विशेष परंपरा है।
पितृपक्ष में कौवे को भोजन खिलाने की परंपरा
मान्यता है कि अगर कौवे ने श्राद्ध का भोजन खा लिया, तो इसका मतलब है कि पितरों ने भी भोजन ग्रहण कर लिया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों के लिए बनाए जाने वाले भोजन में से कौए, गाय, कुत्ते, चींटी और देवताओं का भोग निकालना बहुत जरूरी माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि पितर इन्हीं जीवों के रूप में धरती पर आते हैं।
गरुड़ पुराण और अन्य धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, कौवे को यमराज का संदेशवाहक माना गया है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज कौवे का रूप धारण करके धरती पर आते हैं और श्रद्धा से दिए गए भोजन को स्वीकार करते हैं। माना जाता है कि कौवे द्वारा खाया गया भोजन सीधे पितरों की आत्मा तक पहुंचता है और उन्हें शांति प्रदान करता है। कौए को भोजन कराने से यमराज भी प्रसन्न होते हैं।
पौराणिक कथा और जयंत का प्रसंग
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान इंद्र के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण किया और पृथ्वी पर आकर माता सीता के पैरों में चोंच मार दी। इससे माता सीता के पैर से रक्त बहने लगा। यह दृश्य देखकर भगवान श्रीराम ने तिनके का बाण चलाकर कौवे (जयंत) की आंख फोड़ दी। अपनी जान बचाने के लिए जयंत तीनों लोकों में भागा, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।
अंत में जयंत ने वापस आकर भगवान श्रीराम और माता सीता से क्षमा मांगी। भगवान श्रीराम ने उन्हें माफ कर दिया और यह वरदान दिया कि पितृपक्ष के दौरान कौवों को अर्पण किया गया भोजन सीधे पितरों को प्राप्त होगा। इसी मान्यता के बाद से ही पितृ पक्ष में कौवों को भोजन कराने की परंपरा चली आ रही है, जिसके बारे में अधिक जानकारी आप ड्रिक पंचांग पर देख सकते हैं।
पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति
मान्यता यह भी है कि पितृ पक्ष के दौरान कौवों को भोजन कराने से कुंडली में मौजूद ‘पितृ दोष’ और ‘कालसर्प दोष’ शांत होते हैं। कौवे को भोजन देने से पितर प्रसन्न होते हैं और पूरे परिवार को सुख, समृद्धि और आरोग्यता का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
कौवे को भोजन अर्पित करने की विधि
कौवे को भोजन अर्पित करने की प्रक्रिया एक विशेष विधि के अनुसार पूरी की जाती है। इस दौरान उड़द की दाल, चावल और गुड़ का प्रसाद तैयार किया जाता है। इसे तर्पण स्थल पर रखा जाता है और फिर कौवे को यह भोजन दिया जाता है ताकि पूर्वज तृप्त हो सकें।



