ब्राजील के वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो को हराकर जीत हासिल की है। इस जीत के साथ लूला चौथी बार ब्राजील की सत्ता में लौटे हैं। वे मंगलवार को 81 साल के होने वाले हैं। फ्लेवियो पूर्व दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं।
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक आधिकारिक नतीजों में लूला को 51.75 प्रतिशत और फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.25 प्रतिशत वोट मिले। पहले दौर में फ्लेवियो आगे रहे थे। चुनाव के दिन तक वे पोल में अपनी बढ़त को लेकर काफी भरोसे में थे।
लूला ट्रंप के मुखर आलोचक माने जाते हैं। उनकी जीत के बाद लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और वाशिंगटन के बीच कुछ दूरी बनी रहने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक इस नतीजे से ब्राजील ने उस दक्षिणपंथी लहर को रोका है, जिसने अर्जेंटीना, चिली, कोलंबिया और पेरू जैसे देशों को दक्षिणपंथ की ओर मोड़ा था।
मतदान के दिन अफरा-तफरी
घोटालों और एक-दूसरे पर आरोपों वाले प्रचार के बाद रविवार को मतदान के दौरान काफी अफरा-तफरी रही। सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी समय में मतदान का समय दो घंटे बढ़ा दिया। यह फैसला लूला के अनुरोध पर लिया गया, जिन्होंने बताया था कि कई शहरों में बसें बंद कर दी गई थीं और लोगों को वोट डालने में परेशानी हो रही थी।
भारी बारिश के कारण फ्लेवियो बोल्सोनारो ने भी कुछ इलाकों में समय बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन उनके खेमे ने पूरे देश में समय बढ़ाने के फैसले की कड़ी आलोचना की। बोल्सोनारो समर्थक सांसद निकोलस फरेरा ने एक्स पर लिखा, “या तो हम जीतेंगे, या फिर हम ही जीतेंगे। इसे एक चेतावनी समझें।” इस कड़वे प्रचार ने 20 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले देश के गहरे मतभेद उजागर किए।
पहले दौर की हार के बाद वापसी
ब्राजील की राजनीति में चार दशक से अहम भूमिका निभा रहे लूला को पहले दौर में बोल्सोनारो के हाथों बड़ा झटका लगा था। इसके बाद वामपंथी खेमे ने “अब और नहीं बोल्सोनारो” के नारे के साथ बड़ी रैलियां निकालीं। इनमें प्रदर्शनकारियों ने याद दिलाया कि पूर्व राष्ट्रपति ने कोविड महामारी को संभालने में भारी गड़बड़ी की, अमेजन के वर्षावनों को नुकसान पहुंचाया और कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की।



