नई दिल्ली: बरसात के मौसम में फ्लू के लक्षण अक्सर आम सर्दी-खांसी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, लेकिन यही लापरवाही कई बार गंभीर परेशानी का कारण बन जाती है। मानसून में वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं और फ्लू ऐसा ही एक संक्रमण है जो नाक, गले के साथ फेफड़ों को भी प्रभावित कर सकता है।
फ्लू के लक्षण और पहचान
फ्लू होने पर अचानक तेज बुखार आना, सूखी खांसी, गले में दर्द, तेज सिरदर्द, पूरे शरीर में दर्द और अत्यधिक थकान महसूस होती है। कई मरीजों को भूख कम लगने की शिकायत भी रहती है। ये लक्षण आम सर्दी से अलग होते हैं क्योंकि फ्लू में बुखार अचानक और तेजी से चढ़ता है, जबकि सर्दी में लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं।
कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह
अधिकांश लोग घर पर आराम, पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार लेकर ठीक हो जाते हैं, लेकिन हर मरीज की स्थिति एक जैसी नहीं होती। तेज बुखार जो उतर न रहा हो, सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या लगातार बिगड़ती तबीयत को कतई नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।
उच्च जोखिम वाले समूह बरतें विशेष सावधानी
छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी गंभीर बीमारी (जैसे मधुमेह, हृदय रोग, अस्थमा) से पीड़ित लोगों को फ्लू के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। इनमें जटिलताओं का खतरा अधिक होता है।
पानी की कमी रोकना सबसे जरूरी
बुखार और पसीने के कारण शरीर से तेजी से पानी निकलता है। बीमारी में प्यास कम लगने से डिहाइड्रेशन का खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। सूप, नारियल पानी, नींबू पानी और इलेक्ट्रोलाइट घोल भी ले सकते हैं। यदि उल्टी या दस्त की समस्या हो तो शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी तेजी से होती है — ऐसी स्थिति में बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। चाय और कॉफी को पानी का विकल्प न समझें, ये डीहाइड्रेशन बढ़ा सकते हैं।
आराम और संक्रमण रोकथाम
फ्लू के दौरान शरीर वायरस से लड़ रहा होता है, इसलिए ज्यादा काम करने या पर्याप्त आराम न करने से थकान बढ़ सकती है और रिकवरी धीमी हो जाती है। बुखार और शरीर दर्द होने पर पूरी नींद लें। संक्रमण फैलने से रोकने के लिए बीमार व्यक्ति को दूसरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक रूमाल या टिश्यू से ढकें, उपयोग के बाद टिश्यू को ढक्कन वाले कूड़ेदान में फेंकें और हाथों को साबुन-पानी से बार-बार धोएं या सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
पौष्टिक आहार छोड़ने की भूल न करें
भूख कम होने के बावजूद लंबे समय तक खाना छोड़ना उचित नहीं है। शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हल्का और पौष्टिक भोजन लें। दाल, अंडा, दूध, दही, पनीर जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ मौसमी फल और हरी सब्जियां भी आहार में शामिल करें। खिचड़ी, दलिया, मूंग दाल का पानी जैसे हल्के भोजन उपयोगी विकल्प हैं। तला-भुना, मसालेदार और भारी भोजन से परहेज करें।
एंटीबायोटिक का अनावश्यक प्रयोग नुकसानदायक
फ्लू वायरस के कारण होता है, इसलिए हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। ये दवाएं मुख्य रूप से बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के इलाज में काम आती हैं और वायरस पर सीधा असर नहीं करतीं। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है — इससे एंटीबायोटिक प्रतिरोधकता बढ़ती है और आंत के लाभकारी बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। यदि डॉक्टर द्वितीयक जीवाणु संक्रमण की आशंका जताएं, तभी एंटीबायोटिक लें।
बचाव ही बेहतर इलाज
फ्लू से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनें, हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें, रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए संतुलित आहार लें और पर्याप्त नींद लें। वार्षिक फ्लू वैक्सीन के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें, विशेषकर यदि आप उच्च जोखिम वाले समूह में आते हैं। बरसात के इस मौसम में जागरूकता और समय पर कदम ही आपको और आपके परिवार को स्वस्थ रख सकते हैं।
स्रोत: WHO – Influenza (Seasonal)

