भागलपुर में बाढ़ का कहर: शहरी इलाकों में घुसा पानी, छतों पर रहने को मजबूर लोग

भागलपुर में बाढ़

भागलपुर: गंगा नदी के उफान ने भागलपुर में बाढ़ की विभीषिका को शहरी सीमाओं तक पहुंचा दिया है। ग्रामीण और दियारा इलाकों को जलमग्न करने के बाद बाढ़ का पानी अब नगर निगम क्षेत्र के रिहायशी वार्डों में तेजी से फैल रहा है, जिससे हजारों परिवारों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

भागलपुर में बाढ़ से शहरी वार्डों में हालात गंभीर

नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 1, 9, 10 और 19 बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित हैं। इन वार्डों की गलियां तालाब में तब्दील हो चुकी हैं और घरों के निचले हिस्से पूरी तरह डूब चुके हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैकड़ों परिवार अपने घरों की छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं। पीने के पानी, खाने-पीने की वस्तुओं, दवाइयों और बच्चों के लिए दूध जैसी बुनियादी जरूरतें जुटाना भी चुनौती बन गया है।

महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को इस आपदा में सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को पानी के बीच से ही गुजरकर सुरक्षित स्थानों या राहत सामग्री लेने के लिए जाना पड़ रहा है। कई शहरी स्कूलों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

शांति समिति के सदस्य एवं समाजसेवी संजय कुमार यादव ने बताया कि वार्ड नंबर 19 में जलस्तर काफी ऊंचा है और प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुविधाएं और राहत सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने के साथ-साथ इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।

संजय कुमार ने कहा, “हर साल बाढ़ और कटाव से जनता त्रस्त होती है। प्रशासन को सुखाड़ (गर्मी) के समय ही कटाव रोधी और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े स्थायी कार्य करने चाहिए, ताकि हर साल ऐसी भयावह स्थिति का सामना न करना पड़े।” उन्होंने आरोप लगाया कि फिलहाल गंगा के बढ़ते जलस्तर ने शहर के रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में लेकर प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है।

स्थायी समाधान की दरकार

विशेषज्ञों का मानना है कि हर वर्ष आने वाली इस आपदा से निपटने के लिए केवल राहत वितरण ही काफी नहीं है। बिहार सरकार को गंगा नदी के तटबंधों की मरम्मत, कटाव निरोधक कार्य और जल निकासी की समुचित व्यवस्था पर दीर्घकालिक योजना बनाकर काम करना होगा। तभी भागलपुर जैसे ऐतिहासिक शहर को हर साल डूबने से बचाया जा सकेगा।

फिलहाल, पीड़ित परिवारों को तत्काल भोजन, दवा, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की सख्त जरूरत है। जिला प्रशासन ने नावों की व्यवस्था बढ़ाने और राहत शिविर संचालित करने का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर नजर आ रही है।

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