
विपक्ष ने कहा- एसआईआर पर चुनाव आयोग में भारी घमासान
आयोग ने कहा- सभी की सहमति से लिया फैसला, मतभेद नहीं
नई दिल्ली। हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर चल रहे कथित मतभेदों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एसआईआर प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा अन्य दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच आंतरिक असहमति रही है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने इन सभी मतभेदों की खबरों का पूरी तरह से खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि आयोग के सभी फैसले आपसी सहमति और सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं, जिसमें सभी सदस्यों की पूर्ण मंजूरी शामिल रही है।
सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया था कि आयुक्तों ने नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, चुनावी डेटा की सुरक्षा, आईटी सिस्टम और फॉर्म-6 में बदलाव जैसे विभिन्न मुद्दों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। पश्चिम बंगाल में लंबित अपीलों और सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं पर भी सवाल उठाए जाने की बात कही गई थी। इन आंतरिक चर्चाओं और रिपोर्टों के आधार पर विपक्षी दलों ने आयोग को घेरना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस स्थिति को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि संस्था के सदस्यों को निष्पक्ष रूप से काम करने की स्वतंत्रता नहीं है, तो यह गंभीर विषय है। वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी मतदाता सूची के प्रबंधन और डिजिटल सिस्टम के केंद्रीय नियंत्रण को लेकर सवाल उठाए हैं, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में बहस और अधिक तेज हो गई है।
इन तमाम विवादों और चर्चाओं के बीच, चुनाव आयोग ने 2023 के कानून की धारा 18 का हवाला देते हुए अपने कामकाज की पारदर्शिता को रेखांकित किया है। आयोग का कहना है कि जहां तक संभव हो कार्य सर्वसम्मति से किया जाता है और बैठकों के दौरान अलग-अलग राय सामने आना तथा अंतिम निर्णय लिया जाना दो अलग बातें हैं। आयोग ने दोहराया है कि एसआईआर से जुड़े सभी निर्णय सभी सदस्यों की सहमति से ही तय किए गए हैं। एक तरफ जहां आधिकारिक सूत्रों ने किसी भी तरह के मतभेद से साफ इनकार किया है, वहीं दूसरी तरफ विभिन्न मुद्दों पर सामने आ रही आपत्तियों की चर्चाओं ने संस्था की कार्यशैली को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर राजनीतिक दलों की पैनी नजर बनी हुई है।




