कोलकाता: पूर्व रेलवे कबाड़ निपटान में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए देश के शीर्ष तीन जोनल रेलवे में शामिल हो गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में कबाड़ बिक्री से 251.92 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया है।
पूर्व रेलवे कबाड़ निपटान अभियान की प्रमुख उपलब्धियां
शनिवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सफलता ‘मिशन शून्य कबाड़ संतुलन’ अभियान का हिस्सा है। इस अभियान का उद्देश्य कार्यशालाओं, डिपो, शेड, यार्ड और अन्य रेलवे परिसरों में पड़े अप्रचलित सामानों का व्यवस्थित निस्तारण करना है। 31 अगस्त 2026 तक निर्धारित 207.17 करोड़ रुपये के आनुपातिक लक्ष्य के मुकाबले 251.92 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो लक्ष्य से 21 प्रतिशत अधिक है।
वार्षिक लक्ष्य का 45 प्रतिशत हासिल
चालू वित्त वर्ष के 565 करोड़ रुपये के कुल वार्षिक लक्ष्य का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा पहले पांच महीनों में ही हासिल कर लिया गया है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 193 करोड़ रुपये था, जिसकी तुलना में इस वर्ष 30.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता अनुपयोगी सामानों की नियमित पहचान, निरंतर निगरानी और पारदर्शी निपटान प्रक्रिया के कारण संभव हुई है।
राजस्व संग्रह का विस्तृत विवरण
इस राजस्व संग्रह में सबसे बड़ा योगदान अप्रचलित इंजीनियरिंग और ट्रैक सामग्री की बिक्री से मिला है:
- पुरानी पटरियों का निपटान: लगभग 11,500 मीट्रिक टन पुरानी पटरियों के निस्तारण से 28.56 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
- विविध लौह कबाड़: लगभग 29,055 मीट्रिक टन लौह कबाड़ से 100.63 करोड़ रुपये का राजस्व मिला।
- गैर-लौह कबाड़: गैर-लौह कबाड़ की बिक्री से 53.65 करोड़ रुपये अर्जित किए गए।
रोलिंग स्टॉक नीलामी से आय
अनुपयोगी घोषित किए गए रोलिंग स्टॉक की नीलामी से भी उल्लेखनीय आय हुई:
- 175 अनुपयोगी यात्री डिब्बों के निस्तारण से 31.87 करोड़ रुपये
- 310 मालगाड़ी वैगनों की नीलामी से 11.82 करोड़ रुपये
अधिकारियों के बयान
पूर्व रेलवे के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक संदीप शुक्ला ने बताया कि यह उपलब्धि समन्वित प्रयासों, कबाड़ की समय पर पहचान और इलेक्ट्रॉनिक नीलामी प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी निपटान के कारण संभव हुई है। यह अभियान पूर्व रेलवे के चारों मंडलों — हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा — के साथ-साथ जमालपुर, लिलुआ, हालिशहर और कांचरापाड़ा स्थित प्रमुख कार्यशालाओं और स्टोर डिपो में व्यापक स्तर पर चलाया गया।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम मांझी ने कहा कि कबाड़ निपटान अभियान से न केवल रेलवे को गैर-किराया राजस्व प्राप्त हो रहा है, बल्कि इससे बहुमूल्य रेलवे भूमि और भंडारण स्थल भी खाली हो रहे हैं। इससे कार्यस्थल की सुरक्षा और स्वच्छता में सुधार के साथ-साथ धातुओं के पुनर्चक्रण को भी बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व रेलवे ‘मिशन शून्य कबाड़ संतुलन’ के लक्ष्य को पूरी तरह प्राप्त करने के लिए इस अभियान को आगे भी इसी गति से जारी रखेगा।
पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ
रेलवे में कबाड़ निपटान का महत्व केवल राजस्व तक सीमित नहीं है। भारतीय रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है, जहां बड़ी मात्रा में पुरानी पटरियां, डिब्बे, इंजन और अन्य उपकरण समय के साथ अप्रचलित हो जाते हैं। इनके वैज्ञानिक निस्तारण से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है। धातुओं का पुनर्चक्रण खनन गतिविधियों को कम करता है और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाता है। भारतीय रेलवे की यह पहल सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप भी है।
भविष्य की योजनाएं
पूर्व रेलवे ने आने वाले महीनों में कबाड़ पहचान और निपटान प्रक्रिया को और तेज करने की योजना बनाई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-नीलामी प्रणाली के विस्तार से पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। सभी मंडलों और कार्यशालाओं को मासिक लक्ष्य दिए गए हैं, जिनकी नियमित समीक्षा की जाएगी।



