नई दिल्ली: केंद्र सरकार अगले माह अक्टूबर से 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) 2.0 प्रशिक्षण बैच शुरू करेगी। इसके तहत 34,920 ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि अक्टूबर माह में कुल 1,164 बैच प्रारंभ होंगे और यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 31 दिसंबर 2027 तक संचालित होगा।
डीडीयू-जीकेवाई 2.0 प्रशिक्षण का विस्तृत विवरण
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना के दूसरे संस्करण यानी डीडीयू-जीकेवाई 2.0 के तहत नए प्रशिक्षण बैच शुरू किए जा रहे हैं। पहले चरण में जिन 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तैयारियों की समीक्षा पूरी हो चुकी है, उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मिजोरम, सिक्किम और पुडुचेरी शामिल हैं। इन राज्यों में 31 दिसंबर 2027 तक कुल 3,57,112 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने का स्वीकृत लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
योजना का उद्देश्य और अवधि
डीडीयू-जीकेवाई योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीब युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस योजना के तहत प्रशिक्षण की अवधि न्यूनतम 3 महीने से अधिकतम 12 महीने तक होती है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद युवाओं को प्लेसमेंट सहायता भी प्रदान की जाती है, ताकि वे आजीविका के स्थायी साधन प्राप्त कर सकें। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 1,200 से अधिक परियोजनाओं के तहत कुल 5.6 लाख ग्रामीण युवाओं का लक्ष्य आवंटित किया जा चुका है।
एकीकृत पोर्टल से मिलेगी पारदर्शिता
डीडीयू-जीकेवाई 2.0 की एक प्रमुख विशेषता इसका एकीकृत पोर्टल है। यह पोर्टल परियोजना प्रबंधन को सुगम बनाने, अधिक दक्षता सुनिश्चित करने, पारदर्शिता लाने और डिजिटल निगरानी को बढ़ावा देने में सक्षम है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रशिक्षण केंद्रों, प्रशिक्षुओं और प्लेसमेंट की वास्तविक समय पर निगरानी संभव हो सकेगी। इससे योजना के क्रियान्वयन में जवाबदेही और गुणवत्ता दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।
चयनित राज्यों में प्रशिक्षण की रूपरेखा
- उत्तर प्रदेश और बिहार: बड़ी आबादी वाले इन राज्यों में सर्वाधिक संख्या में बैच आवंटित किए जाने की संभावना है।
- मध्य प्रदेश और राजस्थान: ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल अंतर को पाटने पर विशेष जोर रहेगा।
- पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्य: मिजोरम, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं।
- दक्षिणी राज्य: कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु में आईटी और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े पाठ्यक्रम प्रमुख होंगे।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का फोकस केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण के बाद कम से कम 70 प्रतिशत प्रशिक्षुओं को नियमित रोजगार से जोड़ना अनिवार्य शर्त है। इसके लिए उद्योग जगत के साथ एमओयू भी किए जा रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए आप पीआईबी की आधिकारिक वेबसाइट या योजना के पोर्टल पर जा सकते हैं।
इस पहल को ग्रामीण भारत की बेरोजगारी की समस्या को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीडीयू-जीकेवाई 2.0 प्रशिक्षण के डिजिटल निगरानी तंत्र से योजना की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। आने वाले महीनों में शेष राज्यों के लिए भी बैच शुरू करने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।



