प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि हर युग में पावर के अपने स्रोत और अपनी परिभाषा रही है, लेकिन 21वीं सदी में बड़ा बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज टेक्नोलॉजी, डेटा और नॉलेज ही पावर हैं। उनके मुताबिक अहम सवाल यह नहीं कि पावर किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने सवाल उठाया कि क्या टेक्नोलॉजी सिर्फ कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी या करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर बनाएगी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या नॉलेज चुनिंदा लोगों की ताकत बनी रहेगी या सबकी क्षमता बढ़ाएगी।
उन्होंने कहा कि यहीं से एक नया विचार जन्म लेता है, “पावर टू एम्पावर”। उनके शब्दों में, अब “पावर टू कंट्रोल” से आगे “पावर टू इनेबल” का समय है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दूसरों को सशक्त बनाने का यह मानवीय भाव सिर्फ उपदेश देने के लिए नहीं है। यह हजारों साल की परंपरा ने सिखाया है, और भारत ने इसे अपनी गवर्नेंस और कार्य संस्कृति में लागू करके दिखाया है।
“मदर ऑफ डेमोक्रेसी” और डिजिटल पावर
मोदी ने भारत को “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” बताया। उन्होंने कहा कि देश में 100 से ज्यादा भाषाएं हैं, करीब 80,000 पंजीकृत अखबार और प्रकाशन हैं और 1,000 से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के दौर में भारत में 50 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब यूजर और 50 करोड़ से ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर हैं। उनके मुताबिक देश में अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर बहस होती है और जनता चर्चा करती है, जिसमें डिजिटल पावर की बड़ी भूमिका रही है।
डिजिटल पेमेंट की मिसाल
विदेश से आए मेहमानों से प्रधानमंत्री ने कहा कि वे भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आजमाकर देखें। उन्होंने कहा कि एक स्ट्रीट वेंडर और कार शोरूम का कारोबार और उसका स्केल अलग-अलग है, फिर भी दोनों डिजिटल पेमेंट के एक ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। यही इन्क्लूसिव टेक्नोलॉजी की ताकत है।



