अजरबैजान में सरकारी स्कूलों के नए ड्रेस कोड को लेकर धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के बीच बहस तेज हो गई है। देश की लगभग 96 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, लेकिन स्कूलों में हिजाब और इस्लामिक हेडस्कार्फ पहनने को लेकर नए नियमों के बाद विरोध के स्वर उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि नए ड्रेस कोड में धार्मिक परिधानों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन कुछ स्कूलों में हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का तर्क है कि स्कूलों में एक समान ड्रेस कोड लागू करना और शिक्षा व्यवस्था के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बनाए रखना जरूरी है। वहीं, इस फैसले की आलोचना करने वालों का कहना है कि धार्मिक पहचान के आधार पर किसी को स्कूल आने से रोकना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सवाल खड़ा करता है। सोवियत संघ से अलग होकर 1991 में स्वतंत्र हुआ अजरबैजान संवैधानिक रूप से एक धर्मनिरपेक्ष देश है। ऐसे में हिजाब को लेकर उठा विवाद अब केवल स्कूल यूनिफॉर्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक अधिकारों, व्यक्तिगत पसंद और धर्मनिरपेक्षता के बीच संतुलन की व्यापक बहस बन गया है।